संकटा चतुर्थी व्रत कथा (Sankata Chaturthi Vrat Katha)
संकटा चतुर्थी क्या है?
संकटा चतुर्थी भगवान श्री गणेश को समर्पित एक अत्यंत शुभ व्रत है। यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं, बाधाएँ समाप्त होती हैं और सुख‑समृद्धि की प्राप्ति होती है।
संकटा चतुर्थी को कई स्थानों पर संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है।

संकटा चतुर्थी व्रत का महत्व
- भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है
- मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक संकट दूर होते हैं
- कार्यों में सफलता और बुद्धि की प्राप्ति होती है
- संतान सुख और स्वास्थ्य लाभ मिलता है
संकटा चतुर्थी व्रत कथा
प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक गरीब ब्राह्मण रहता था। वह अत्यंत धार्मिक और सत्यनिष्ठ था, परंतु उसका जीवन दुखों से भरा हुआ था। गरीबी, रोग और पारिवारिक समस्याओं ने उसे घेर रखा था।
एक दिन किसी साधु ने ब्राह्मण को संकटा चतुर्थी व्रत रखने की सलाह दी और कहा कि विधि‑विधान से भगवान गणेश की पूजा करो, तुम्हारे सभी संकट दूर हो जाएंगे।
ब्राह्मण ने श्रद्धा के साथ संकटा चतुर्थी का व्रत रखा। पूरे दिन उपवास किया, गणेश जी की पूजा की और रात को चंद्र दर्शन कर व्रत खोला। कुछ समय बाद उसके जीवन में चमत्कारी परिवर्तन आने लगे।
उसकी आर्थिक स्थिति सुधरने लगी, परिवार में सुख‑शांति आई और रोग दूर हो गए। तभी से यह व्रत संकटों को हरने वाला माना जाने लगा।
संकटा चतुर्थी व्रत पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
- दूर्वा, लाल फूल, मोदक अर्पित करें
- गणेश मंत्र का जाप करें
- कथा का पाठ करें
- रात में चंद्र दर्शन कर व्रत का पारण करें
संकटा चतुर्थी व्रत में क्या खाएं
- फल
- दूध
- साबूदाना
- मूंगफली
- सिंघाड़े का आटा
संकटा चतुर्थी व्रत के लाभ
- जीवन के संकट दूर होते हैं
- मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है
- घर में सुख‑समृद्धि आती है
निष्कर्ष
संकटा चतुर्थी व्रत भगवान गणेश की कृपा पाने का अत्यंत सरल और प्रभावी उपाय है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह व्रत जीवन की हर बाधा को दूर करने में सहायक होता है।
संकटा चतुर्थी व्रत क्या है?
उत्तर: संकटा चतुर्थी भगवान श्री गणेश को समर्पित मासिक व्रत है, जो कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत जीवन के संकटों को दूर करने के लिए किया जाता है।
संकटा चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी में क्या अंतर है?
उत्तर:
दोनों एक ही व्रत हैं। कुछ क्षेत्रों में इसे संकटा चतुर्थी और कुछ में संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। उद्देश्य भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करना है।
संकटा चतुर्थी व्रत का क्या लाभ है?
उत्तर:
इस व्रत से मानसिक तनाव, आर्थिक संकट, रोग और बाधाएँ दूर होती हैं। साथ ही बुद्धि, सफलता और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।