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श्री रामचन्द्र जी का राजतिलक-2 , अयोध्या काण्ड

श्री रामचन्द्र जी का राजतिलक-2 , (अयोध्या काण्ड , श्री रामचरितमानस)

    “रचहु मंजु मनि चौकें चारू ,कहहु बनावन बेगि बजारू। पूजहु गनपति गुर कुलदेवा ,सब बिधि करहु भूमिसुर सेवा “|| अयोध्या में सुन्दर मणियों के मनोहर चौक पुरवाओ और बाजार को तुरंत सजाने के लिए कह दो। श्री गणेश जी, गुरु और कुलदेवता की पूजा करो और भूदेव ब्राह्मणों की सब प्रकार से सेवा …

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सीता जी का विवाह मण्डप में आगमन

सीता जी का विवाह मण्डप में आगमन, श्री रामचरितमानस

सीता जी का विवाह मण्डप में आगमन सीता जी सभी सखियों के साथ मण्डप में प्रवेश करती हैं सहज ही सुन्दरी सीता जी स्त्रियों के समूह में इस प्रकार शोभा पा रही हैं, मानो छवि रूपी ललनाओं के समूह के बीच साक्षात परम मनोहर शोभा रूपी स्त्री सुशोभित हो । सभी ने उन्हें मन ही …

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सीता-राम विवाह समारोह

सीता-राम विवाह समारोह , श्री रामचरितमानस

सीता-राम विवाह समारोह   “मंगल मूल लगन दिनु आवा हिम रितु अगहनु मासु सुहावा। ग्रह तिथि नखतु जोगु बर बारू लगन सोधि बिधि कीन्ह बिचारू।।”   सीता-राम विवाह समारोह मंगलों का मूल लग्न का दिन आ गया हेमन्त ऋतु और सुहावना अगहन का महीना था। ग्रह , तिथि , नक्षत्र, योग और वार श्रेष्ठ थे। …

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जनकपुर में बारातियों का स्वागत

जनकपुर में बारातियों का स्वागत

जनकपुर में बारातियों का स्वागत       जनकपुर में बारातियों का स्वागत , बारात ऐसी बनी कि उसका वर्णन करते नहीं बनता। सुन्दर शुभदायक शकुन हो रहे हैं। तीनों प्रकार की शीतल, मंद , सुगंधित हवा अनुकूल दिशा में चल रही है। स्वयं सगुण ब्रह्म जिसके सुन्दर पुत्र हैं, उसके लिए सब मंगल शकुन सुलभ …

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अयोंध्या में राम जी के बारात की तैयारी

अयोंध्या में राम जी के बारात की तैयारी

अयोंध्या में राम जी के बारात की तैयारी अयोंध्या में राम जी के बारात की तैयारी ,जनकपुर से आये दूत से जब राजा दशरथ अपने दोनो पुत्रों का हाल चाल लेने लगें – “स्यामल गौर धरें धनु भाथा , बय किसोर कौसिक मनि साथा । पहिचानहु तुम्ह कहहु सुभाऊ , प्रेम बिबस पुनि पुनि कह …

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अयोध्या में विवाह हेतु जनकपुर से संदेश

  अयोध्या में विवाह हेतु जनकपुर से संदेश परशुराम जी को राम जी के धनुष तोड़ने पर विश्वास नही था तब उन्होंने श्रीराम चन्द्र जी से धनुष उठाने के लिए कहा, हे राम- धनुष को हाथ में लीजिए और खींचिए जिससे मेरा संदेह मिट जाए। परशुराम जी धनुष देने लगे, तब वह आप ही चल …

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जय श्री राम

श्री रामचन्द्र जी का परशुराम जी से क्षमा प्रार्थना

श्री रामचन्द्र जी का परशुराम जी से क्षमा प्रार्थना   लक्ष्मण जी का परशुराम जी के प्रति असभ्य व्यवहार को लेकर श्री राम जी परशुराम जी से क्षमा मागते हुए कहते हैं कि यदि बालक कुछ चपलता भी करते हैं तो गुरु, पिता और माता मन में आनंद से भर जाते हैं। अत: इसे छोटा …

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लक्ष्मण

लक्ष्मण – परशुराम संवाद -2

लक्ष्मण – परशुराम संवाद -2   ” बिहसि लखनु बोले मृदु बानी , अहो मुनीसु महा भटमानी ।  पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारु , चहत उड़ावन फूँकि पहारू।।” लक्ष्मण जी हंसकर कोमल वाणी से बोले – अहो मुनिश्वर तो अपने को बड़ा भारी योद्धा समझते हैं बार बार मुझे कुल्हाड़ी दिखाते हैं। फूँक से पहाड़ …

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लक्ष्मण – परशुराम जी का संवाद

“तेहि अवसर सुनि सिवधनु भंगा। आयहु भृगकुल कमल पतंगा।।” शिवजी के धनुष का टूटना सुनकर भृगुकुल रूपी कमल के सूर्य परशुराम जी आए जिन्हें देखकर सब राजा सकुचा गये, मानो बाज के झपटने पर बटेर छुप गये हैं। गोरे शरीर पर भस्म बड़ी फब रही है और विशाल ललाट पर त्रिकुंड विशेष शोभा दे रहा …

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