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धनुष भंग, श्री राम चन्द्र जी शिव जी के धनुष को कमल की डण्डी की भाँति तोड़े

धनुष भंग, श्री राम चन्द्र जी शिव जी के धनुष को कमल की डण्डी की भाँति तोड़े   “सुनि गुरु बचन चरन सिरु नावा ,हरषु बिषादु न कछु उर आवा। ठाढ़े भए उठि सहज सुभाएं ठवनि, जुबा मृगराज लजाएँ।।” गुरु के वचन सुनकर श्रीराम चन्द्र जी ने गुरु के चरणो में सिर नवाया। उनके मन …

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सीता जी का स्वयंवर में आगमन, वर्णन

सीता जी का स्वयंवर में आगमन, वर्णन   “जानि सुअवसरु सीय तब पठई जनक बोलाइ। चतुर सखी सुंदर सकल सागर चलीं लवाइ।।” तब सुअवसर जानकर जनक जी ने सीता जी को बुलावा भेजा। सब चतुर और सुंदर सखियां आदर पूर्वक उन्हें लेने चली। “सीय सोभा नहीं जाइ बखानी जगदंबिका रूप गुन खानी। उपमा सकल मोहि …

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श्रीराम

राजसभा में श्रीराम जी के यश और सुन्दरता का बखान

राज्य सभा में श्रीराम जी के यश और सुन्दरता का बखान   राज्य सभा में श्रीराम जी के यश और सुन्दरता का बखान श्रीराम चन्द्र जी अपने छोटे भाई लक्ष्मण जी और गुरु वशिष्ठ जी के साथ राजा दशरथ जी के धनुषशाला में पहुँचते है । जहाँ पर भगवान परशुराम जी का दिव्य धनुष रखा …

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श्री राम और लक्ष्मण जी नगर में धनुष यज्ञ भूमि देखने पहुंचते है

श्री राम और लक्ष्मण जी नगर में धनुष यज्ञ भूमि देखने पहुंचते है   “सतानंद पद बंदि प्रभु बैठे गुर पहिं जाइ। चलहु तात मुनि कहेउ तब पठवा जनक बोलाइ।।” शतानंद जी के चरणों की वंदना करके प्रभु श्री राम जी गुरु जी के पास जाकर बैठे तब मुनि ने कहा हे तात चलो जनक …

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