धनुष भंग, श्री राम चन्द्र जी शिव जी के धनुष को कमल की डण्डी की भाँति तोड़े
धनुष भंग, श्री राम चन्द्र जी शिव जी के धनुष को कमल की डण्डी की भाँति तोड़े “सुनि गुरु बचन चरन सिरु नावा ,हरषु बिषादु न कछु उर आवा। ठाढ़े भए उठि सहज सुभाएं ठवनि, जुबा मृगराज लजाएँ।।” गुरु के वचन सुनकर श्रीराम चन्द्र जी ने गुरु के चरणो में सिर नवाया। उनके मन …
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