लक्ष्मण – परशुराम जी का संवाद
“तेहि अवसर सुनि सिवधनु भंगा। आयहु भृगकुल कमल पतंगा।।” शिवजी के धनुष का टूटना सुनकर भृगुकुल रूपी कमल के सूर्य परशुराम जी आए जिन्हें देखकर सब राजा सकुचा गये, मानो बाज के झपटने पर बटेर छुप गये हैं। गोरे शरीर पर भस्म बड़ी फब रही है और विशाल ललाट पर त्रिकुंड विशेष शोभा दे रहा …









