गुरु विश्वामित्र आगमन, ताड़का तथा मारीच वध
गुरु विश्वामित्र आगमन, ताड़का तथा मारीच वध “जहँ जप जग्य जोग मुनि करहीं । अति मारीच सुबाहुहि डरहीं ।। देखत जग्य निसाचर धावहिं । करहिं उरद्रव मुनि दुख पावहिं ।।” गुरु विश्वामित्र के आश्राम में जब मुनि लोग जप , यज्ञ , योग करते थे तब मारीच और सुबाहु नाम के दो राक्षर …




