रामचरितमानस अयोध्या काण्ड अर्थ सहित
यहाँ प्रस्तुत रामचरितमानस अयोध्याकाण्ड का शुरुआती भाग है, जिसमें कुछ श्लोक और दोहा हैं। श्रीगणेशायनमः श्रीजानकीवल्लभो हवजयते श्रीरामचररतमानस हितीय सोपान श्री अयोध्या काण 1. श्लोक: “यस्याङ्के च विभवति भूधरसुतादेवी पगे मस्तके…” अर्थ: जिस भगवान की गोद में हिमालय की पुत्री पार्वती शोभायमान हैं, जिनके मस्तक पर पवित्र गंगा बह रही है, ललाट पर चंद्रमा विराजमान …








