सीता जी की विदाई,श्री रामचरितमानस
सीता जी की विदाई , मंगल की राशि शुभ शकुन हो रहे हैं। …
सीता जी की विदाई , मंगल की राशि शुभ शकुन हो रहे हैं। …
सीता जी का विवाह मण्डप में आगमन सीता जी सभी सखियों के साथ मण्डप में प्रवेश करती हैं सहज ही सुन्दरी सीता जी स्त्रियों के समूह में इस प्रकार शोभा पा रही हैं, मानो छवि रूपी ललनाओं के समूह के बीच साक्षात परम मनोहर शोभा रूपी स्त्री सुशोभित हो । सभी ने उन्हें मन ही …
सीता जी का विवाह मण्डप में आगमन, श्री रामचरितमानस Read More »
सीता-राम विवाह समारोह “मंगल मूल लगन दिनु आवा हिम रितु अगहनु मासु सुहावा। ग्रह तिथि नखतु जोगु बर बारू लगन सोधि बिधि कीन्ह बिचारू।।” सीता-राम विवाह समारोह मंगलों का मूल लग्न का दिन आ गया हेमन्त ऋतु और सुहावना अगहन का महीना था। ग्रह , तिथि , नक्षत्र, योग और वार श्रेष्ठ थे। …
जनकपुर में बारातियों का स्वागत जनकपुर में बारातियों का स्वागत , बारात ऐसी बनी कि उसका वर्णन करते नहीं बनता। सुन्दर शुभदायक शकुन हो रहे हैं। तीनों प्रकार की शीतल, मंद , सुगंधित हवा अनुकूल दिशा में चल रही है। स्वयं सगुण ब्रह्म जिसके सुन्दर पुत्र हैं, उसके लिए सब मंगल शकुन सुलभ …
अयोंध्या में राम जी के बारात की तैयारी अयोंध्या में राम जी के बारात की तैयारी ,जनकपुर से आये दूत से जब राजा दशरथ अपने दोनो पुत्रों का हाल चाल लेने लगें – “स्यामल गौर धरें धनु भाथा , बय किसोर कौसिक मनि साथा । पहिचानहु तुम्ह कहहु सुभाऊ , प्रेम बिबस पुनि पुनि कह …
अयोध्या में विवाह हेतु जनकपुर से संदेश परशुराम जी को राम जी के धनुष तोड़ने पर विश्वास नही था तब उन्होंने श्रीराम चन्द्र जी से धनुष उठाने के लिए कहा, हे राम- धनुष को हाथ में लीजिए और खींचिए जिससे मेरा संदेह मिट जाए। परशुराम जी धनुष देने लगे, तब वह आप ही चल …
श्री रामचन्द्र जी का परशुराम जी से क्षमा प्रार्थना लक्ष्मण जी का परशुराम जी के प्रति असभ्य व्यवहार को लेकर श्री राम जी परशुराम जी से क्षमा मागते हुए कहते हैं कि यदि बालक कुछ चपलता भी करते हैं तो गुरु, पिता और माता मन में आनंद से भर जाते हैं। अत: इसे छोटा …
श्री रामचन्द्र जी का परशुराम जी से क्षमा प्रार्थना Read More »
लक्ष्मण – परशुराम संवाद -2 ” बिहसि लखनु बोले मृदु बानी , अहो मुनीसु महा भटमानी । पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारु , चहत उड़ावन फूँकि पहारू।।” लक्ष्मण जी हंसकर कोमल वाणी से बोले – अहो मुनिश्वर तो अपने को बड़ा भारी योद्धा समझते हैं बार बार मुझे कुल्हाड़ी दिखाते हैं। फूँक से पहाड़ …
“तेहि अवसर सुनि सिवधनु भंगा। आयहु भृगकुल कमल पतंगा।।” शिवजी के धनुष का टूटना सुनकर भृगुकुल रूपी कमल के सूर्य परशुराम जी आए जिन्हें देखकर सब राजा सकुचा गये, मानो बाज के झपटने पर बटेर छुप गये हैं। गोरे शरीर पर भस्म बड़ी फब रही है और विशाल ललाट पर त्रिकुंड विशेष शोभा दे रहा …
धनुष भंग, श्री राम चन्द्र जी शिव जी के धनुष को कमल की डण्डी की भाँति तोड़े “सुनि गुरु बचन चरन सिरु नावा ,हरषु बिषादु न कछु उर आवा। ठाढ़े भए उठि सहज सुभाएं ठवनि, जुबा मृगराज लजाएँ।।” गुरु के वचन सुनकर श्रीराम चन्द्र जी ने गुरु के चरणो में सिर नवाया। उनके मन …
धनुष भंग, श्री राम चन्द्र जी शिव जी के धनुष को कमल की डण्डी की भाँति तोड़े Read More »